हिमाचल प्रदेश के ऊना में बल्क ड्रग पार्क को मिली पर्यावरणीय मंजूरी, औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

ऊना में बनने वाले बुल्क ड्रग पार्क को भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) मिल गई है
हिमाचल प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, ऊना जिले में स्थापित होने वाले महत्वाकांक्षी बल्क ड्रग पार्क को भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से बहुप्रतीक्षित पर्यावरणीय मंजूरी (EC) मिल गई है। यह मंजूरी फार्मास्युटिकल क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने वाली इस विशाल परियोजना के लिए मार्ग प्रशस्त करती है।
प्रमुख पर्यावरणीय दिशा-निर्देश: 2 सितंबर 2025 को हुई 414वीं बैठक में विशेषज्ञ समिति ने जल प्रबंधन, शून्य तरल निकासी (ZLD), पर्यावरण संरक्षण और जोखिम प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान की। मंजूरी में कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल हैं:

परियोजना क्षेत्र का 33% हरा-भरा क्षेत्र सुनिश्चित किया जाए।

विकास के लिए 65-70% क्षेत्र का उपयोग किया जाए।

कम से कम 10% सौर ऊर्जा का उपयोग अनिवार्य है।

सतह और भूजल के संतुलन को बनाए रखा जाए।

नालों के आसपास बफर जोन बनाए जाएं।

मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए जियो-टेक्सटाइल का उपयोग किया जाए।

ऊना में बनने वाले बुल्क ड्रग पार्क को भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) मिल गई है
मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री की प्रतिक्रिया: मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस अवसर पर कहा, “बल्क ड्रग पार्क हिमाचल प्रदेश को फार्मा निर्माण में अग्रणी बनाने के साथ-साथ राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर उपलब्ध कराएगा।”

उद्योग मंत्री श्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी विकास के अगले चरणों को तेजी से आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेगी और यह फार्मा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उद्योग विभाग के निदेशक डॉ. यूनुस ने इस परियोजना को समयबद्ध ढंग से पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई, जिसका उद्देश्य एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) और की स्टार्टिंग मैटेरियल्स (KSM) पर विदेशी निर्भरता को कम करना है।

यह परियोजना भारत सरकार के फार्मास्युटिकल विभाग की “बल्क ड्रग पार्क प्रोत्साहन योजना” के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन करते हुए और पर्यावरण मंत्रालय के परामर्शानुसार विकसित की जाएगी। इस महत्वपूर्ण कदम से हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक विकास में नए आयाम जुड़ेंगे और राज्य के युवाओं के लिए नए रोजगार सृजन के अवसर उत्पन्न होंगे।

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