
प्रमुख पर्यावरणीय दिशा-निर्देश: 2 सितंबर 2025 को हुई 414वीं बैठक में विशेषज्ञ समिति ने जल प्रबंधन, शून्य तरल निकासी (ZLD), पर्यावरण संरक्षण और जोखिम प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान की। मंजूरी में कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल हैं:
परियोजना क्षेत्र का 33% हरा-भरा क्षेत्र सुनिश्चित किया जाए।
विकास के लिए 65-70% क्षेत्र का उपयोग किया जाए।
कम से कम 10% सौर ऊर्जा का उपयोग अनिवार्य है।
सतह और भूजल के संतुलन को बनाए रखा जाए।
नालों के आसपास बफर जोन बनाए जाएं।
मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए जियो-टेक्सटाइल का उपयोग किया जाए।

उद्योग मंत्री श्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी विकास के अगले चरणों को तेजी से आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेगी और यह फार्मा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उद्योग विभाग के निदेशक डॉ. यूनुस ने इस परियोजना को समयबद्ध ढंग से पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई, जिसका उद्देश्य एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) और की स्टार्टिंग मैटेरियल्स (KSM) पर विदेशी निर्भरता को कम करना है।
यह परियोजना भारत सरकार के फार्मास्युटिकल विभाग की “बल्क ड्रग पार्क प्रोत्साहन योजना” के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन करते हुए और पर्यावरण मंत्रालय के परामर्शानुसार विकसित की जाएगी। इस महत्वपूर्ण कदम से हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक विकास में नए आयाम जुड़ेंगे और राज्य के युवाओं के लिए नए रोजगार सृजन के अवसर उत्पन्न होंगे।




